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प्रणाम

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प्रेम की पटरी

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  प्रेम वाह! कितना पावन शब्द है- ' प्रेम '। इस पावन शब्द का विस्तार भी अति अपार है। इस दुनिया मे प्रेम सदा से ही कायम रहा है और जब तक दुनिया है तब तक के लिए तो कायम ही रहेगा। लेकिन हां, प्रेम रूप बदलता रहा है और शायद बदलता ही रहेगा। 

पैसों की भीड़

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 भूमिका:

प्यारा सा दोहा

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एक प्यारा सा दोहा: भूमिका:  यह दोहा स्पष्ट रूप से, भागदौड़ भरे इस जीवन में कमजोर पड़ते मानवीय रिश्तों पर आधारित हैं। कवि महेेेश कुमार (हरियाणवी) अपनों का सम्मान हूँ, सपनों का अरमान। उनकी मुझमें हैं बसी, मेरी उनमें जान।। महेेेश कुमार (हरियाणवी) #हिंदीकविता #HindiPoem #maheshkumarharyanvi 🎑🎑🎑